अनवर जलालपुरी के चुनिंदा शेर

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जलाया है दिया तो फिर हवाओं पे नजर रखो ये झोक एक पल में सब चिरागों को बुझा देता है

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कोई पूछेगा जिस दिन ये वाकिया जिंदिगी का क्या है जमीं से एक मिटटी खाक लेकर हम उडा देंगे

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तू मेरे पास था या तेरी पुराणी यदि कोई एक शेर भी तनहा नहीं लिखा है